Friday, October 23, 2026
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दिल ने फिर याद किया कहां हो तुम प्यार से पुकार लो जहां हो तुम

रायगढ़। आज रायगढ़ के माटी पुत्र छत्तीसगढ़ और देश के गौरव शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी का जन्मदिन उनके ही नाम से नामित शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी स्टेडियम में बड़ी सादगी और गरिमामय आयोजन के माध्यम से मनाया गया।
शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी स्टेडियम में आज सुबह से ही उनके प्रतिमा स्थल पर शहर के लोगों का आना-जाना शुरू हो चुका था। जिनमें पूर्व सैनिक संघ के जिला अध्यक्ष एस एन प्रधान और उनके संघ से जुड़े लोगों के अलावे जिला सैनिक कल्याण कार्यालय रायगढ़ में सैनिक कल्याण की जिम्मेदारी वहन कर रहे पूर्व सैनिक की उपस्थिति के अलावे कर्नल विप्लव त्रिपाठी के परिजन तथा अन्य सामाजिक, सांस्कृतिक संस्थाओं जिनमें एनएसएस के स्वयंसेवक भी बड़ी संख्या में उपास्थित थे। जिनमें भूतपूर्व सैनिक संघ के रायगढ़ जिला अध्यक्ष एस.एन. प्रधान एवं उनके सहयोगी पूर्व सैनिक भी उपस्थित थे अलावे इसके जिला सैनिक कल्याण कार्यालय के वेलफेयर ऑफिसर बालकिशन राम, रामनिवास, सागर मित्र कुरील के अलावे अन्य भी उपस्थित थे।
शुरूआत कर्नल विप्लव त्रिपाठी के परिजनों की ओर से दीप प्रज्वलित कर माल्र्यापण के साथ हुई। उसके बाद उपस्थित अन्य लोगों ने भी पुष्पाजंलि अर्पित की और शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी की शहादत को सलाम किया। इस अवसर पर सुबह से ही लाऊड स्पीकर पर देशभक्ति से ओत-प्रोत गीतों का प्रसारण होता रहा जिससे पूरा माहौल देशभक्ति पूर्ण बन गया था।
उल्लेखनीय है कि रायगढ़ में जन्म लेने वाले कर्नल विप्लव त्रिपाठी ने अपने बचपन में ही भारतीय सेना में शामिल होने का निर्णय ले लिया था और रायगढ़ जिले से सैनिक स्कूल में राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के बाद दाखिल होने में सफलता प्राप्त की थी और उसके बाद राष्ट्रीय रक्षा अकादमी खडक़वासाला पूणे में भी उनका चयन हो गया था और वे शायद रायगढ़ के पहले विद्यार्थी थे जिनका चयन एनडीए खडक़वासाला पूणे के लिये हुआ। वहां तीन सालों तक कड़े प्रशिक्षण करने के बाद उनका चयन आईएमए देहरादून के लिये हुआ और वहां एक वर्ष तक कठिन प्रशिक्षण करने के बाद उन्हें भारत के राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर कमिशन प्राप्त हुआ और उसके बाद वे बहुत कमशिन उम्र में दुनिया के सबसे ऊंचे और खतरनाक युद्धक्षेत्र से अपने सैन्य जीवन की शुरूआत कर अमूमन आतंकवादी प्रभावित क्षेत्रों में अपनी सेवाएं देने के बाद 13 नवम्बर 2021 को मणिपुर में एक अलगाववादी हमले का सामना करते हुए अपनी पत्नी और सात वर्षीय बेटे के अलावे चार जवानों के साथ वीरगति प्राप्त की थी। आज रायगढ़ में अपने उसी वीर सपूत को याद करते हुए उन्हें उन्हीं ही प्रतिमा के माध्यम से श्रद्धा-सुमन अर्पित कर शहर के लोगों ने उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यापित की।

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