
महज दस से पन्द्रह सेकंड की एक रील जिसमे मोदीजी ने इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी को स्वदेशी चाकलेट मेलोडी भेट कर रहे हैं सोशल मीडिया पर साझा किया और इंटरनेट मानो फट पड़ा। महज एक घन्टे मे दस लाख की व्यूअरशिप और अब तक बीस करोड़ दर्शक, यह रिकॉर्ड है आज तक का। कैडबरी, डार्क फैन्टेसी या लिनडेड जैसी मंहगी विदेशी चाकलेटो की भीड़ में मेलोडी जैसी साधारण सी टाफी किसी कोने मे दुबक सी गई थी अचानक सुर्खियों मे आ गई और इस घटना के पश्चात दो दिनों मे उसका स्टाक खत्म भी हो गया। इसी टाफी के विज्ञापन के लिए बालीवुड के किसी महंगे स्टार को लिया जाता तो शायद उसकी फीस एक से डेढ़ करोड़ होती। बहरहाल मुफ्त मे भारत और इटली के संबंधों मे मिठास के साथ इस टाफी ने ग्लोबल मार्केट में अपनी पहचान भी दर्ज कर दी। मोदी जी यह भलीभांति जानते हैं कि आज के इस डिजिटल वारफेयर में जवाब भी डिजिटल तरीकों से दिया जाता है। आज की पीढ़ी का युवा नेताओं के उबाऊ या भडक़ाऊ भाषणों या देश की चिन्ता मे दुबले होते बुद्धिजीवियों के लेखन को पढऩे की बजाय उस दस सेकंड की क्लिप जो बिन कहे बहुत कुछ कह जाती है देखना जादा पसंद करेगा। कोई मर्यादाहीन बात नहीं और ना ही कोई अभद्र भाषा। इससे सीख मिलती है हर नेताओं को चाहे वह मोदी जी की पार्टी से ही क्यों ना हो या जिम्मेदार शासकीय पदों पर बैठे हों। भाषा की अभद्रता पहले आपके ही व्यक्तित्व का अवमूल्यन करती है। प्रधानमंत्री मोदी और मेलोनी पर स्तरहीन टिप्पणी करने वाले भूल जाते है कि ऐसी तस्वीरे तो हमारे पूर्व प्रधानमंत्री स्व.नेहरू की भी इंटरनेट पर उपलब्ध है। खैर जाकि रही भावना जैसी….मौजूदा राजनीति मे मर्यादाहीन संवादों का जो दौर चल रहा है वह शर्मनाक है।
वर्तमान में पूरा विश्व आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। भारत भी इससे अछूता नहीं रह सकता। उर्जा संकट के बावजूद इस देश में महगाई यदि बढ़ी है तो यह अन्य देशों की तुलना में कम ही है। ऐसी परिस्थितियों में देश का प्रधान यदि अन्य देशों की राजनीतिक यात्रा पर जाते है तो इसे कूटनीतिक यात्रा भी कह सकते हैं जो देश हित मे ही होती है और भविष्य के लिए फायदेमंद भी। इन यात्राओं से मोदी जी का स्तर भी वैश्विक स्तर पर बढ़ा है साथ ही अन्य देशों से सौहार्दपूर्ण संबंध भी लेकिन एक पक्ष जिसे इससे पीड़ा हो रही है वह अभी भी उनके विरोध की कुंठा से ग्रसित होकर कभी एक विदेशी अपरिपक्व पत्रकार के बयान को अपना एजेंडा बना लेता है तो कभी माननीय न्यायाधीश के द्वारा युवाओं पर की गई टिप्पणी को अपना हथियार बनाकर देश के युवाओं को भडक़ाने का काम करता है। हास्यास्पद बात यह है कि सोशल मीडिया पर काकरोच पार्टी भी बना डाली और दो करोड़ फालोअर्स भी। जिस विदेशी महिला पत्रकार ने मोदी जी से सवाल पूछा था जिसके बमुश्किल सात या आठ सौ फालोअर्स थे अचानक तीन हजार से जादा हो जाएं तो षड्यंत्र गहरा नजर आता है। जो सुदूर बैठे काकरोच पार्टी बनाकर देश के जेन जी वर्ग मे अशांति फैलाने का नया एजेंडा चलाना चाह रहे है उन्हें जेन जी का मिजाज समझना हो तो पश्चिम बंगाल के चुनाव को याद कर ले। भारतीय नारी शक्ति को समझे या हालिया संपन्न फालटा के विधानसभा चुनाव को याद करें जिसने रिकॉर्ड तोड़ एक लाख से जादा मतो से किसी पार्टी विशेष ने जीत दर्ज की जिसमें बेबी बूम जनरेशन से जेन जी तक का सहयोग रहा। काकरोच जैसी पार्टियों के लिये तो लाल या काला हिट ही काफी है।
आशा त्रिपाठी
